जनवरी 2026 में सुप्रीम कोर्ट ने आरक्षण नीति और प्रतियोगी परीक्षाओं को लेकर दो महत्वपूर्ण और अलग-अलग परिस्थितियों वाले फैसले सुनाए हैं। यह लेख इन दोनों फैसलों की बारीकियों को स्पष्ट करता है ताकि उम्मीदवारों के बीच कोई भ्रम न रहे।

1. फैसला: जब आरक्षण का लाभ लेने वाला जनरल सीट का हकदार नहीं होता
जस्टिस जे.के. माहेश्वरी और जस्टिस विजय बिश्नोई की पीठ ने स्पष्ट किया कि यदि कोई उम्मीदवार चयन प्रक्रिया के प्रारंभिक चरण (जैसे प्रीलिम्स) में आयु, शुल्क या कट-ऑफ में आरक्षित वर्ग की छूट (Relaxation) का लाभ उठाता है, तो वह बाद में जनरल सीट पर दावा नहीं कर सकता।
- नियम: एक बार आरक्षण की रियायत (Concession) लेने के बाद, उम्मीदवार को पूरी प्रक्रिया में उसी श्रेणी का हिस्सा माना जाएगा।
- प्रभाव: भले ही मुख्य परीक्षा या इंटरव्यू में उसके अंक जनरल कैटेगरी के उम्मीदवार से अधिक हों, उसका चयन केवल उसकी आरक्षित श्रेणी की सीट पर ही होगा।
2. फैसला: जब आरक्षित वर्ग का उम्मीदवार जनरल सीट का हकदार होता है
इसके विपरीत, 5 जनवरी 2026 को जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस ऑगस्टीन जी. मसीह की पीठ ने एक अन्य फैसले में कहा कि SC, ST, OBC और EWS उम्मीदवार जनरल पोस्ट के लिए पूरी तरह पात्र हैं।
- शर्त: यह केवल तभी लागू होता है जब उम्मीदवार ने चयन के किसी भी चरण में आरक्षण संबंधी किसी रियायत (जैसे कम कट-ऑफ या आयु सीमा) का लाभ न लिया हो।
- मेरिट सर्वोपरि: यदि उम्मीदवार ने अपनी मेहनत से जनरल कैटेगरी का कट-ऑफ पार किया है, तो उसे ‘अनारक्षित’ श्रेणी में गिना जाएगा। कोर्ट के अनुसार, ‘ओपन’ श्रेणी किसी जाति विशेष के लिए नहीं, बल्कि मेरिट आधारित पूल है।
निष्कर्ष और उम्मीदवारों के लिए सलाह
सुप्रीम कोर्ट के ये फैसले ‘मेरिट’ और ‘आरक्षण’ के बीच संतुलन बनाने की कोशिश करते हैं:
- मेरिट माइग्रेशन: बिना किसी छूट के बेहतर अंक लाने पर आप जनरल सीट पा सकते हैं।
- नो डबल बेनिफिट: यदि आपने शुरुआती स्तर पर आरक्षण का ‘फायदा’ लिया है, तो आप जनरल सीट पर ‘हक’ नहीं जता सकते।
यह स्पष्टता UPSC, SSC और राज्य लोक सेवा आयोगों जैसी आगामी परीक्षाओं के चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता लाएगी। अधिक कानूनी जानकारी के लिए आप सुप्रीम कोर्ट की आधिकारिक वेबसाइट पर विस्तृत निर्णय देख सकते हैं।