शिमला। हिमाचल प्रदेश में लोकतंत्र की सबसे छोटी इकाई ‘पंचायतों’ के भविष्य को लेकर अनिश्चितता के बादल मंडरा रहे हैं। प्रदेश की 3,577 ग्राम पंचायतों के साथ-साथ जिला परिषदों और ब्लॉक समितियों के चुनाव समय पर होंगे या नहीं, इसका फैसला अब कोर्ट की दहलीज पर है।
1. कार्यकाल और संवैधानिक बाध्यता
हिमाचल में वर्तमान पंचायतों का 5 साल का कार्यकाल 31 जनवरी 2026 को पूरा हो रहा है। संवैधानिक नियमों के अनुसार, कार्यकाल समाप्त होने से पहले नई पंचायतों का गठन होना जरूरी है। यदि चुनाव समय पर नहीं होते हैं, तो पंचायतों को मिलने वाली केंद्रीय ग्रांट पर भी संकट गहरा सकता है।
2. सरकार और चुनाव आयोग के बीच टकराव का कारण
चुनाव में देरी का मुख्य कारण राज्य सरकार और राज्य निर्वाचन आयोग (SEC) के बीच नियमों और परिसीमन (Delimitation) को लेकर उपजा विवाद है:
- डिजास्टर मैनेजमेंट एक्ट (DMA): सुक्खू सरकार ने मानसून के दौरान हुई भारी तबाही और सड़कों की खराब स्थिति का हवाला देते हुए राज्य में ‘डिजास्टर मैनेजमेंट एक्ट’ लागू कर रखा है। मुख्यमंत्री का तर्क है कि जब तक यह एक्ट प्रभावी है, तब तक चुनाव कराना चुनौतीपूर्ण है।
- परिसीमन का मुद्दा: सरकार ने जिला परिषद और पंचायतों के वार्डों के परिसीमन में कुछ बदलाव किए थे, जिसे हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट ने असंवैधानिक बताते हुए निरस्त कर दिया है। कोर्ट के इस फैसले से 160 जिला परिषद वार्डों पर असर पड़ा है।
3. हाई कोर्ट में चल रही सुनवाई
पंचायत चुनावों में हो रही देरी पर हाई कोर्ट ने कड़ा संज्ञान लिया है। हाल ही में 6 जनवरी 2026 को हुई सुनवाई के दौरान कोर्ट ने सरकार और चुनाव आयोग से स्पष्ट जवाब माँगा है। कोर्ट इस बात की जांच कर रहा है कि क्या सरकार आपदा की आड़ में चुनाव टालने की कोशिश कर रही है।
4. इस बार क्या बदल जाएगा?
अगर चुनाव समय पर होते हैं, तो इस बार कुछ नए नियम लागू होंगे:
- जाति प्रमाणपत्र अनिवार्य: आरक्षित सीटों पर चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों को अब केवल शपथ-पत्र (Affidavit) से काम नहीं चलेगा; उन्हें तहसीलदार से प्रमाणित जाति प्रमाणपत्र देना अनिवार्य होगा।
- पंचायतों की संख्या: प्रदेश में नगर निगमों और नगर पंचायतों के विस्तार के कारण पंचायतों की कुल संख्या 3,619 से घटकर 3,577 रह गई है।
5. चुनाव कब तक होने की संभावना?
राज्य निर्वाचन आयोग ने जिला निर्वाचन अधिकारियों को तैयार रहने के निर्देश दिए हैं। हालांकि, सरकार ने संकेत दिए हैं कि वे चुनाव प्रक्रिया को जुलाई 2026 तक खींच सकते हैं। फिलहाल सबकी नजरें हाई कोर्ट के अगले फैसले पर टिकी हैं, जो यह तय करेगा कि हिमाचल की जनता जनवरी में अपने नए प्रधान चुनेगी या प्रशासकों के भरोसे पंचायतों का काम चलेगा।